The Goat Life Movie Review : पीड़ा और अदम्य जिजीविषा की लंबी कहानी
Aadujeevitham: The Goat Life Review : अच्छे भविष्य की उम्मीद के साथ हर साल हजारों लोग खाड़ी देश काम करने जाते हैं. कई लोगों के साथ अलग-अलग तरह के धोखे होते हैं. कभी फर्जी वीजा तो कभी वहां नियोक्ता (मालिक) का वीजा और पासपोर्ट छीन लेना. एक धोखा हुआ था केरल के एक मलयाली युवक नजीब (पृथ्वीराज सुकुमारन) और हाकिम (केसर गोकुल) के साथ.
यह कहानी मलयालम भाषा की फिल्म अदुजिवीथम यानी द गोट लाइफ की है. नजीब केरल के एक गांव में अपनी मां और पत्नी के साथ रह रहा होता है. नदी से रेत निकालने का काम करता है. जिंदगी में खुशियां होती हैं, बाप बनने वाला होता है. बस पैसे नहीं होते. इसी के लिए घर गिरवी रखकर सऊदी अरब जाता है. और वहां वह एक भेंड फार्म के मालिक का गुलाम बन जाता है. इसके बाद नजीब के टार्चर और सर्वाइवल की कहानी शुरू होती है.
फिल्म निर्देशक ब्लेसी ने इस सर्वाइवल की कहानी को पर्दे पर बेहद संजीदगी से उतारा है. फिल्म की शुरुआत होती है नजीब के मवेशियों के बर्तन में पानी पीने से. यहां से फिल्म अतीत में जाती है और कहानी परत दर परत खुलती है. जिसमें बेहद कम पैसे के बाद भी खुशननुमा जिंदगी और रोमांस है. अपने लोग हैं.
फिर कहानी वर्तमान में लौट आती है और वह रेत में लेटा हुआ दिखता है. यह सीन झकझोर सा देता है.
फिल्म की सबसे बड़ी बात है कि यह मानवीय संवेदना, इमोशन और उम्मीद को कहीं खोती नहीं है. नजीब ने सऊदी अरब में तीन साल गुलामों की जिंदगी जी. उसे बेरहमी से पीटा जाता था. खाने तो एक सूखी रोटी और थोड़ा सा पानी मिलता था. जानवरों के बाड़े में सोता था. फिर भी उसने उम्मीद नहीं खोई.
फिल्म में कई सीन इतने कमाल के हैं कि अभीभूत कर देते हैं. एक सीन आता है, जब नजीब आजाद होने के लिए भागने वाला होता है. वह बकरियों और ऊंटों को सारे चारे खिला देता है. नजीब के साथ भेड़ें भी इस विदाई के पल में भावुक सी दिखती हैं. ऐसे ही एक सीन है विदा लेने के समय का ही. जब वह नंगे होकर जाता है नहाने. चेहरे पर पानी गिरता है. तीन साल नें पहली बार नहाता है. इसमें आजादी की उम्मीद से उपजा एक सुकून है. इसके बाद वह नए पैंट और शर्ट निकालता है. उसने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी घर जाने की.
वह भी सीन तो क्या कमाल का है, जब अपने साथ गए लड़के से गुलाम बनाए जाने के बाद पहली बार मिलता है. दोनों लिपटकर रोते हैं और बस रोते जाते हैं.
यह फिल्म कास्ट अवे सहित तमाम फिल्मों से अलग है. इसमें सर्वाइवल किसी दुर्घटना या एक्सीडेंट के बाद का नहीं है. बेहतर जिंदगी की उम्मीद में खाड़ी समेत तमाम देशों में गुलाम बना लिये गए लोगों का सर्वाइवल, उनकी पीड़ा और जद्दोजगह है. यह हजारों लोग के सर्वाइवल की कहानी है. नजीब तो बस उन सब का प्रतिनिधि है. कुछ समय पहले पढ़ा था कि पंजाब से इटली खेती में मजदूरी करने गए कई लोगों के साथ भी जानवरों जैसा सलूक होता है. ऐसी कहानियां ग्रीस में काम कर रहे लोगों की भी सुनी है.
यह फिल्म मलयालम भाषा के उपन्यास अदुजिवीथम पर बनी है. जिसे बेन्यामिन ने लिखा है. यह मलयाली भाषा का सबसे अधिक बिकने वाला उपन्यास है. दिलचस्प यह भी है कि इस पर बनी फिल्म भी मलयालम भाषा की सबसे बड़ी हिट फिल्म रही. इस उपन्यास में नजीब नाम के व्यक्ति की कहानी है, जो अरब में गुलाम बन जाता है.
अच्छी कहानी वाली और संजीदगी से फिल्माई गई फिल्म देखनी है, तो अदुजिवीथम यानी द गोट लाइफ को मिस नहीं करना चाहिए.

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